6. पुस्तक-संग्रह के सत्यापन कार्य को सफल एवं सुविधाजनक बनाना

6. पुस्तक-संग्रह के सत्यापन कार्य को सफल एवं सुविधाजनक बनाना 

। प्रायः पुस्तकों में पुस्तक-संग्रह का वार्षिक सत्यापन किया जाता है । वर्गीकृत क्रम में व्यवस्थित पुस्तकों की फलक सूची-पत्रकों की सहायता से बड़ी सुगमता से जाँच की जा सकती है क्योंकि पुस्तक में प्राप्त प्रत्येक पुस्तक का फलक सूची-पत्रक मनाया जाता है तथा इन पत्रकों का व्यवस्थापन भी वर्गीकृत क्रम में होता है । 

7. विषयवार आकड़े तैयार करने के कार्य को सरल बनाना । पुस्तकालय में विभिन्न प्रयोजनों के लिये पुस्तकों के विषयवार आंकड़े तैयार किये जाते हैं । ये आंकड़े पुस्तकालय की प्रगति की जानकारी उच्च अधिकारियों को देने, वार्षिक रिपोर्ट में प्रकाशित करवाने एवं पुस्तकालय के लिये अनुदान प्राप्त करने के लिये समय-समय पर प्रस्तुत करने पड़ते हैं । पाठकों द्वारा उधार लिए गये पुस्तकों के आंकड़े विभिन्न विषयों पर प्रलेखों की मांग एवं उनके उपयोग के परिदृश्य को प्रतिबिम्बित करते हैं । वर्गीकृत सूची एवं वर्गीक आधारित अन्य रेकार्ड की सहायता लेकर विभिन्न प्रकार के आकड़े तैयार करने का कार्य सरल हो जाता है ।
8. संदर्भ सेवा के कार्य को सफल एवं सरल बनाने में सहायक होना । पाठकों द्वारा विभिन्न विषयों पर पूछे गये प्रश्नों की पक्ष विश्लेषण में सहायता प्रदान करके अप्रत्यक्ष रुप से प्रभावी एंव कारगर सन्दर्भ सेवा प्रदान करने के कार्य को सरल बनाता है ।

9. पुस्तकों एवं अन्य अध्ययन सामग्री की विषयानुसार तदर्थ ग्रन्थ सूचियां एवं संघीय प्रसूचियां तैयार करने के कार्य में सहायक होना । 

सभी पुस्तकालयों में पाठक अपने अध्ययन सम्बन्धी आवश्यकता को ध्यान में रखकर ग्रंथ सूचियां बनाने के लिये पुस्तकालय से अपेक्षा करते है । प्रसूची के वर्गीकृत भाग की सहायता से इस प्रकार की पुस्तक सूचियाँ आसानी से तैयार की जा सकती हैं ।
10. पुस्तक-संग्रह की पूर्णता एवं अपूर्णता को प्रदर्शित करने में सहायता देना 1 वर्गीकृत क्रम में व्यवस्थिति पुस्तक-संग्रह का अवलोकन करके यह आसानी से ज्ञात हो जाता है। कि पुस्तकालय में किन-किन विषयों के ग्रंथों का संग्रह अपर्याप्त एवं अपूर्ण है और इस प्रकार विभिन्न विषयों के पुस्तक-संग्रह की कमी को दूर किया जा सकता है तथा पुस्तक- संग्रह को सबल बनाया जा सकता है ।
11. सुनियोजित ढंग से विषय-प्रविष्टि निर्माण करने के कार्य में सहायता देना । प्रसूचीकरणकार वर्ग संख्याओं के माध्यम से श्रृंखला विधि का प्रयोग करके विशिष्ट विषय प्रविष्टि एवं वर्ग निर्देशी प्रविष्टि तैयार करता है ।
12. थिसारस (पर्याय कोश) की संरचना में वर्गीकरण के सिद्धान्त सहायक होते हैं ।
13. ज्ञान जगत के विकास की जटिलताओं से अवगत होने तथा उन्हें समझने में पुस्तकालय कर्मियों, विशेषतः वर्गीकरणकारों, को सहायता प्रदान करता है क्योंकि ज्ञान जगत के विकास का ज्ञान पुस्तकालयों में प्रलेखों की सुनियोजित व्यवस्था का आधार होता है ।।
14. आजकल कम्प्यूटर आधारित सूचना पुन: प्राप्ति प्रणाली की कार्य क्षमता को बढ़ाया जाने लगा है, तथा इस प्रकार पुस्तकपरक नियन्त्रण तथा प्रलेखों की पुन: प्राप्ति प्रणाली की सफलता सुनिश्चित करने में वर्गीकरण आधारभूत योगदान करता है ।

15. पुस्तक-संग्रह कक्षों के मार्ग दर्शन में सहायता देना ।

 वर्ग-संख्याओं की सहायता से संग्रह कक्ष में उपयुक्त स्थानों पर उद्देश्य एवं संदर्शिकायें (गाइड) लगा दी जाती हैं,
ताकि पाठक अपने अभीष्ट ग्रंथ तक आसानी से पहुंच सके । 16. वर्गीकरण निम्नलिखित प्रक्रियाओं में भी सहायता प्रदान करता है: –
(क) सूचना का विश्लेषण करने, (ख) प्रसूची के वर्गीकृत भाग में संलेखों का व्यवस्थापन करने ।
6. सारांश
पुस्तकालय में पुस्तक-संग्रह का अधिक से अधिक उपयोग बढ़ाने के लिये विभिन्न प्रकार के संग्रहों का वर्गीकरण करके उन्हें सहायक अनुक्रम में व्यवस्थित करना अत्यावश्यक है। पाठक सम्भवतः पाठ्य सामग्री की तीन प्रकार से मांग कर सकते हैं- जैसे लेखक, आख्या एवं विषय । किन्तु प्रायः सभी पुस्तकालयों में अधिकांश पाठक किसी विशिष्ट विषय के नाम से किसी पुस्तक या पुस्तकों की मांग करते हैं । अतः प्रलेखों का उनमें निहित विषय-वस्तु के आधार पर वर्गीकरण करके पाठकों के विषय अभिगम का पूर्णतया समाधान किया जा सकता है। पुस्तकालय वर्गीकरण द्वारा पुस्तकों प्रलेखों एवं प्रसूची की प्रविष्टियों को विषयानुसार व्यवस्थित किया जा सकता है ।
वर्गीकरण शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द क्लासिस (Classis) से हुई है । सत्ताओं/वस्तुओं के ‘विभाजन’ एंव ‘सामूहिकीकरण’ की प्रक्रिया को वर्गीकरण कहते हैं । विभाजन वस्तुओं में निहित विशेषताओं के आधार पर किया जाता है तथा विभाजन के फलस्वरूप प्राप्त वर्गों का एक पूर्व निर्धारित क्रम में सामूहिकीकरण किया जाता है । वर्गीकरण शब्द का प्रयोग सामान्यत: दो अर्थों में किया जाता है:
सामान्य वर्गीकरण एवं पुस्तकालय वर्गीकरण । सामान्य वर्गीकरण करते समय हम वस्तुओं। विचारों को एक सुनियोजित क्रम में व्यवस्थित करते हैं जबकि पुस्तकालय वर्गीकरण में हम प्रलेखों का वर्गीकरण करते हैं, उनमें निहित विषय वस्तु के आधार पर । ।

वर्गीकरण शब्द का अर्थ स्पष्ट कीजिये एवं पुस्तकालय वर्गीकरण की आवश्यकता एवं कार्य बताइये

रंगनाथन ने पुस्तकालय वर्गीकरण की विस्तृत परिभाषा प्रस्तुत की है । इस परिभाषा के संघटक हैं विशिष्ट विषय, कृत्रिम भाषा, क्रम सूचक अंक एवं विशिष्टता निरूपण | पुस्तकालय के मुख्य क्रियाकलाप जैसे पुस्तकचयन, पुस्तक परिचालन, सन्दर्भ सेवा कुछ-कुछ अप्रत्यक्ष रुप से पुस्तकालय वर्गीकरण पर आश्रित है ।
वर्गीक, ग्रंथांक एवं संग्रहांक ये तीनों मिलकर प्रलेख की क्रांमक संख्या का निर्माण करते प्रलेखों को सुनियोजित सहायक अनुक्रम में व्यवस्थित करने, निधानियों पर पुस्तकों की व्यवस्था को यान्त्रिक बनाने, पाठकों एवं पुस्तकालय कर्मियों के समय के बचत करने, पाठकों की निरन्तर बढ़ती हुई अध्ययन सम्बन्धी आवश्यकताओं को यथातथ्यात्मक रुप से, निःशेषता से एवं शीघ्रता से पूरा करने, पुस्तकालय विज्ञान के पाँच सूत्रों की अनुपालना करने, पुस्तकों/प्रलेखों को विषयानुसार उनके पारस्परिक निकटता के सम्बन्धों की मात्रा के अनुसार सह-सम्बन्धित क्रम में व्यवस्थित करने, पुस्तक-संग्रह की पूर्णता व अपूर्णता की जानकारी देने, सूचना पुन: प्राप्ति के एक आधारभूत साधन के रुप में सहायता देने के लिये पुस्तकालय वर्गीकरण आवश्यक
7. अभ्यासार्थ प्रश्न
2. पुस्तकालय वर्गीकरण की विभिन्न परिभाषाओं का उल्लेख कीजिये ।
3. एस.आर. रंगनाथन द्वारा प्रतिपादित पुस्तकालय वर्गीकरण की परिभाषा की व्याख्या कीजिये ।
4. विषय अभिगम की सार्थकता को स्पष्ट कीजिये ।।
5. पुस्तकालय वर्गीकरण के कार्यों का उल्लेख कीजिये ।
6. पुस्तकालय वर्गीकरण की आवश्यकता एवं उद्देश्य को स्पष्ट कीजिये ।
8. पारिभाषिक शब्दावली क्रम-सूचक अंक वे प्रतीक जिनका केवल क्रम बोधक मान होता है एवं जिनको किसी गणना के लिये प्रयोग में नहीं लाया जाता तथा इन्हें किसी सत्ता/वस्तु/विचार का किसी अनुक्रम सापेक्ष स्थान निश्चित करने के लिये प्रयोग में लाया जाता है ।

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