रागात्मक एवं संख्यात्मक उपविभाजन (Alphabetical and (non decimal) Numerical Sub-Division)

रागात्मक एवं संख्यात्मक उपविभाजन (Alphabetical and (non decimal) Numerical Sub-Division)

भाषा के सर्वसामान्य सहायक (Common Auxiliaries of Languages) देखिये तालिका संख्या
(c) रूप के सर्वसामान्य सहायक (Common Auxiliaries of Form) देखिये तालिका संख्या (d)
(179) स्थान के सर्वसामान्य सहायक (Common Auxiliaries of Space) देखिये तालिका संख्या (e) | (=…) जाति एवं राष्ट्रीयता के सर्वसामान्य सहायक (Common Auxiliaries of Race and Nationality) देखिये तालिका संख्या (f)
A-Z रागात्मक एवं संख्यात्मक उपविभाजन (Alphabetical and (non decimal) Numerical Sub-Division) देखिये तालिका संख्या (h)
.00… दृष्टिकोण सर्वसामान्य सहायक (Common Auxiliaries of Point of View) देखिये तालिका संख्या (i) इन सर्वसामान्य सहायकों को दो समूहों में विभक्त किया जा सकता है:
(अ) स्वतन्त्र सर्वसामान्य सहायक (ब) आश्रित सर्वसामान्य सहायक इन दोनों ही प्रकार के सर्वमान्य सहायकों को किसी भी वर्ग के साथ जोड़ा जा सकता

3.1 स्वतन्त्र सर्वसामान्य सहायक: 

जैसा कि नाम से ही विदित है, ये सर्वसामान्य सहायक स्वतन्त्र रूप से प्रयोग में लाये जा सकते हैं। इस श्रेणी के सहायक वर्ग के पूर्व भी दिये जा सकते हैं और इनसे पुस्तक का पूर्ण वर्गीक निर्मित किया जा सकता है। जैसे
“19” 78 बीसवीं शताब्दी का संगीत यहाँ “19” वीं सदी का द्योतक है और 78 संगीत का। दोनों संख्याओं के योग से यह वर्गीक प्राप्त हुआ है।
(=96) 39 अफरीकन लोक कथाएँ (African Folklore) यहाँ (=98) अफरीकन का द्योतक है और 39 लोक कथाओं का। दोनों संख्याओं के योग से यह वर्गीक प्राप्त हुआ

(54) 72 भारतीय स्थापत्य कला (Indian Architecture)

यहाँ (54) भारत का द्योतक है और 72 स्थापत्य कला (Architecture) का। दोनो के योग से यह वर्गीक प्राप्त हुआ है। इन तीनों उदाहरणों में यह दृष्टव्य है कि यद्यपि “19”, (=98) और (54) प्रायः सारणी में दिये 0/9 प्रमुख वर्गों (Main No.) के बाद ही दिये जाते हैं। तथापि इनका प्रयोग स्वतन्त्ररूप से मुख्य वर्गों के पहले भी किया जा सकता है। 3.2 आश्रित सर्वसामान्य सहायक: इस श्रेणी के सर्वसामान्य सहायक स्वतन्त्र रूप से प्रयोग में नहीं लाये जा सकते। मुख्य वर्ग के दिये जाने के उपरान्त ही इनका प्रयोग किया जा सकता है। जैसे
33(03) अर्थशास्त्र का शब्द कोश (Dictionary of Economics) यहाँ (03) शब्दकोश का प्रयोग अर्थशास्त्र का वर्गीक 33 के बाद ही किया गया है। 297.18.20 English version Koran यहाँ कुरान का वर्गीक 297.18 देने के पश्चात ही =20 अंग्रेजी रूपान्तर को जोड़ा गया 392.54 (=924)ए ज्यूज़ के विवाह के रीति-रिवाज (Marriage Customs of Jews) यहाँ विवाह के रीतिरिवाज 392.54 देने के उपरान्त ही (=924) ज्यूज़ वर्गीक जोड़ा गया है।
यूनीवर्सल डेसीमल क्लैसिफिकेशन की तालिका (k) में तीन और भी सहायक हैं जिन्हें विशिष्ट (सहायक) उपविभाजन की संज्ञा दी गई है। ये इस प्रकार है: हायफन सीरीज 0, पुआइन्ट जीरो सीरीज
अपोस्टॅफी सीरीज हायफन सीरीज़: इस श्रेणी के विशिष्ट सहायक उपविभाजन का प्रयोग मुख्य वर्ग 62(Engineering) एवं 8(Literature) में खुलकर किया गया है। अन्य मुख्य वर्गों में भी इसका प्रयोग किया गया है जैसे – 82- 1
अंग्रेजी काव्य (English Poetry) 83- 1
जर्मन काव्य (German Poetry) 84- 1
फ्रान्सीसी काव्य (French Poetry) 882-1
रूसी काव्य (Russian Poetry) 891.43- 1 हिन्दी काव्य (Hindi Poetry)
पुआइंट जीरो सीरीज – इस श्रेणी के विशिष्ट सहायक उपविभाजनों की भरमार है। अनेक वर्गों में इनके उदाहरण देखने मिल सकते हैं।
अपोस्ट्रॉफी सीरीज – इस श्रेणी के विशिष्ट सहायक उपविभाजनों का प्रयोग बहुत ही सीमित स्तर पर किया गया है। जैसे – 547.29’28 Carboxy-acid esters) यहाँ 547.29 Carboxy-acid है और 547.26 (Alcohols and their esters) की संख्या है । यहाँ पर 547.26 में से अपोस्ट्रॉफी का प्रयोग कर केवल 26 को ही लिया गया है। और 547 को छोड़ दिया गया है ।

4. कोलन क्लैसिफिकेशन में प्रयुक्त सर्वसामान्य एकल

| कोलन क्लैसिफिकेशन में सर्वसामान्य एकलों का प्रयोग बड़े ही प्रभावी ढंग से किया गया है । इसके प्रथम संस्करण (1933) में इनका नाम ‘सामान्य उपविभाजन’ (Common Sub-division) था | इन सामान्य उपविभाजनों के अतिरिक्त इस संस्करण में स्थान (Space), काल (Time) एवं भाषा (Language) एकलों के लिये अलग-अलग सारणियां भी दी गई थी । इन सभी एकलों का प्रयोग आवश्यकतानुसार किसी भी वर्गीक के निर्माण में किया जा सकता था | कोलन क्लैसिफिकेशन के दवितीय और तृतीय संस्करण में भी यही व्यवस्था रही । लेकिन इसके चतुर्थ संस्करण (1952 ) में इन सामान्य उपविभाजन को दो समूहों अर्थात् पूर्ववर्ती (Anteriorising) एवं पश्चवर्ती (Posteriorising) में विभक्त कर दिया गया । 5वें संस्करण में इन्हें ‘सर्वसामान्य एकल’ (Common Isolates) की संज्ञा दी गई । छठे संस्करण (1960) में इनमें कुछ और सुधार किया गया । इस संस्करण में हमें अधोलिखित तीन प्रकार के सर्वसामान्य एकलों का प्रयोग देखने को मिलता है –
(अ) वर्गीक (Class number) से सम्बंधित सर्वसामान्य एकल, (ब) ग्रंथांक (book number) से सम्बंधित सर्वसामान्य एकल, (स) संग्रहांक (Sequence number) से सम्बंधित सर्वसामान्य एकल ।। 4.1 वर्गीक से सम्बंधित सर्वसामान्य एकल | इस श्रेणी में आने वाले सर्वसामान्य एकलों को अधोलिखित तालिका के माध्यम से भली भांती समझा जा सकता है।
सर्वसामान्य सकल (CI)
पूर्ववर्ती सर्वसामान्य एकल (ACI)
पश्चवर्ती सर्वसामान्य एकल (PCI)
– कालपक्ष के उपरान्त प्रयोग होने वाले (ATF)
स्थान पक्ष के उपरान्त प्रयोग होने वोले (ASF) स्थान पक्ष के पूर्व प्रयोग होने वाले (BSF)
व्यक्तित्व (Personality PCI)
पदार्थ (Matter PCI)
ऊर्जा (Energy PCI)

4.1.1 पूर्ववर्ती सर्वसामान्य एकल (Anteriorising Common Isolate)

जैसा कि नाम से ही विदित है, इस श्रेणी के सर्वसामान्य एकलों का पूर्ववर्ती स्थान मान होता है । ये तीन प्रकार के पाये जाते हैं । पहले वे सर्वसामान्य एकल जो स्थान पक्ष के पूर्व स्थापित किये जाते है । दूसरे वे जो स्थान पक्ष के उपरान्त स्थापित किये जाते हैं । तीसरे वे जो काल पक्ष के उपरान्त प्रयोग में लाये जाते है । 4.1.1.1 स्थान पक्ष के पूर्व प्रयोग में आने वाले पूर्ववर्ती सर्वसामान्य एकल कोलन क्लैसिफिकेशन के छठे संस्करण के वितीय भाग के पृष्ठ 25 पर निम्न तालिका दी हुई है। संख्या | पद पक्षपरिसूत्र a | ग्रंथसूची (Bibliography)
शब्दानुक्रमणिका (Concordance) | तालिका (Table) परिसूत्र (Formula)
मानचित्र (Atlas) | k | कोश / विश्व कोश (Cyclopaedia)
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x[S], [T] व्यक्तिगत (Individual)
| निर्देश (Programme of Instruction) y3 | सारांश (Synopsis) y4 विषय क्षेत्र (Scope) y7 | अध्ययन (Case Study) | y8 | सार पुस्तिका

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