अन्त: विषयी प्रभाव दशा सम्बंध :

 अन्त: विषयी प्रभाव दशा सम्बंध :

और दूसरे ग्रंथ में सांख्यकी का निरूपण पुस्तकालयाध्यक्षों को ध्यान में रखकर किया गया है। B और D के बीच का 0 (शून्य) एवं B28 ओर 2 के बीच का 0 (शन्य) दशाकड़ी के रूप में प्रयोग में लाया गया है। तदुपरान्त 1942 में दो अन्य दशा सम्बन्धों (प्रभाव डालने वाले दशा सम्बंध एवं उपकरण दशा सम्बंध) की पहचान की गई और इनके लिए क्रमशः 0d एवं : (कोलन) योजन चिन्हों का प्रावधान किया गया। सन् 1950 के आते-आते इनमें और सुधार किया गया। तृतीय संस्करण (1950) में छ: प्रकार के दशा सम्बंधों का समावेश किया गया जो इस प्रकार हैं:
झुकाव (Biasing) उपकरण (Tool) पहलू (Aspect) तुलना (Comparison) प्रभाव (Influencing) सम्बंध (Relation)
कोलन क्लेसिफिकेशन के चतुर्थ संस्करण (1952) में कोई विशेष परिवर्तन किया गया। लेकिन पाँचवें संस्करण (1957) में इन दशा सम्बंधों के दो स्तरों (i) अंतः विषयी सम्बन्ध (Intra Phase Relation) एवं (ii) अंत: पक्ष सम्बंध (Intra Facet Relation) की पहचान की गई। प्रत्येक स्तर पर पाँच प्रकार के सम्बंधों का देखा गया। ये पाँच सम्बंध इस प्रकार थे।
सामान्य (General) झुकाव (Biasing) तुलना (Comparison)
भेद (Differential) प्रभाव (Influencing)
छठे संस्करण (1960) में एक और स्तर (अंत: पंक्ति दशा सम्बंध) जोड़ दिया गया । 1963 के परिवर्धित संस्करण में पृष्ठ 228 पर इन्हें इस प्रकार दर्शाया गया है:
अंत: पंक्ति | अंत: पक्ष | अंत: विषय | सम्बंध की प्रकृति | j | a | सामान्य (General) झुकाव (Bais) तुलना (Comparison) भेद (Difference)
प्रभाव (Influencing) इनके जोड़ने के लिए 0 (शून्य) का प्रावधान किया गया था लेकिन भ्रम निवारण, के लिए सन् 1967 से 0 (शून्य) के स्थान पर & (एम्परसैंड ) का प्रयोग किया जाने लगा है। क्योंकि लिखने के समय ‘शून्य’ एवं ‘ओ’ दोनों एक से ही एक अन्य ध्यान देने योग्य बात यह है कि जिस उपकरण दशा सम्बंध का उपयोग कोलन क्लैसिफिकेशन के तृतीय और चतुर्थ संस्करण में हुआ था उसका पाँचवें संस्करण में परित्याग कर दिया गया था । सन् 1967 से पुन: प्रयोग में लाया जाने लगा है । इसका योजक चिन्ह इस प्रकार है:
अंत: पंक्ति | अंत: पक्ष | अंतः विषय प्रकृति xx p | e | उपकरण दशा सम्बंध

3. अन्त विषयी दशा सम्बंध (Intra Subject Relation)

जब संबंध दो या दो से अधिक विषयों के मध्य होता है तो वह अन्तःविषयी संबंध कहलाता है । अब अन्तः विषयी दशा संबंध निम्नलिखित छ: प्रकार के होते है : सम्बंध का प्रकार
| योजक चिन्ह अन्त: विषयी सामान्य सम्बन्ध अन्त: विषयी झुकाव सम्बन्ध
&b अन्तः विषयी तुलना सम्बन्ध अन्तः विषयी भेद सम्बन्ध अन्तः विषयी उपकरण सम्बन्ध
अन्त: विषयी प्रभाव सम्बन्ध अन्तः विषयी सामान्य दशा सम्बंध के उदाहरण 3.1 अन्त: विषयी सामान्य दशा सम्बंध Y & a YX समाज शास्त्र एवं समाज कार्य V & a D भौतिकी एवं अभियांत्रिकी यहाँ Y समाजशास्त्र एवं YX समाज कार्य दोनों ही स्वतन्त्र विषय हैं । दोनों विषयों के मध्य सम्बन्धों की प्रदर्शित करने के लिए a का प्रयोग किया गया है । प्रावधान के अनुसार & का प्रयोग a के पहले किया गया है । ठीक यही सम्बन्ध C भौतिकी एवं D अभियांत्रिकी के बीच भी देखने को मिलता है । 3.2 अन्त: विषयी झुकाव दशा सम्बंध के उदाहरण M15 & b 2 पुस्तकालयाध्यक्षों के लिए जिल्दसाज़ी का ज्ञान इस ग्रंथ में जिल्दसाज़ी विषय का निरूपण पुस्तकालयाध्यक्षों के दृष्टिकोण से किया गया है । अत: झुकावदशा सम्बन्ध के लिए निर्दिष्ट b अंक का प्रयोग & के पश्चात किया गया है ।

3.3 अन्त: विषयी तुलना दशा सम्बन्ध E & c F

रसायनशास्त्र एवं प्रौद्योगिकी – एक तुलनात्मक अध्ययन रसायन शास्त्र और प्रौद्योगिकी दोनों ही स्वतन्त्र विषय है । दोनो के तुलनात्मक अध्ययन के लिए अघु अक्षर C का प्रयोग किया गया है । 3.4 अन्त: विषयी भेद दशा सम्बन्ध || & d J वनस्पति शास्त्र और कृषि विज्ञान में भेद यहाँ वनस्पति शास्त्र | एवं J कृषि विज्ञान में भेद के अध्ययन को निर्धारित अंक d दारा दर्शाया गया है ।

3.5 अन्त: विषयी उपकरण दशा सम्बंध

2 & e D6, 8 (B) पुस्तकालयों में संगणकों (कंप्यूटर्स) का प्रयोग यहाँ पुस्तकालयों में कंप्यूटरों को उपकरण के रूप में प्रयोग में लाया गया है । ‘पुस्तकालय’ और ‘कंप्यूटर’ दोनों ही अलग-अलग विषय हैं । दोनों के मध्य सम्बंध दर्शाने के लिए लघु अक्षर e का प्रयोग किया गया है । विधान के अनुसार पुस्तकालय & तो e के पहले लगना ही है । W & gQ धर्म का राजनीति पर प्रभाव
‘राजनीति’ और ‘धर्म’ दोनों ही स्वतंत्र अस्तित्व वाले विषय हैं । यहाँ एक का प्रभाव दूसरे पर देखा जा रहा है। डा. एस.आर. रंगनाथन की अभिधारणा के अनुसार प्रभावित विषय को पहले और प्रभाव डालने वाले विषय को बाद में रखा जाता है और & के पश्चात् लघु अक्षर g के द्वारा इस अन्त: विषयी प्रभाव दशा सम्बंध को उजागर किया जाता है।

4 अन्त पक्ष दशा सम्बंध (Intra Facet Phase Relation)

जब किसी एक मुख्य वर्ग के किसी एक पक्ष के दो समकक्ष एकल (Co-oredinate Array) में संबंध स्थापित किया जाता है, तो वह अन्तःपक्ष दशा सम्बंध होता है । ये संबंधकिसी मुख्य वर्ग के [P] पक्ष, [M] पक्ष, [E]पक्ष तथा[S] पक्ष की दो एकल व संख्याओं के मध्य हो सकते है ।। अंत: पक्ष दशा सम्बंध निम्नलिखित छ: प्रकार के होते हैं: | सम्बंध का प्रकार | योजक चिन्ह | अंतः पक्ष सामान्य &j अंतः पक्ष झुकाव सम्बन्ध । अंतः पक्ष तुलना सम्बन्ध &m अंतः पक्ष भेद सम्बन्ध अंतः पक्ष उपकरण सम्बन्ध | अंतः पक्ष प्रभाव सम्बन्ध |  अन्तःपक्ष सामान्य दशा सम्बन्ध के उदाहरण ।

4.1 अन्त: पक्ष सामान्य दशा सम्बंध T1 & j2

प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा पद्धति मुख्य वर्ग T में ‘प्राथमिक शिक्षा’ एवं ‘माध्यमिक शिक्षा’ दोनों ही व्यक्तित्व पक्ष [P] में उल्लखित हैं। इन दोनों एकलों के बीच सामान्य सम्बंध प्रदर्शित करने के लिए लघु अक्षर j का प्रयोग किया गया है और & का प्रयोग योजक चिन्ह के रूप में। 4.2 अन्त: पक्ष झुकाव दशा सम्बंध 2:5 पुस्तकालय वर्गीकरण एवं संदर्भ सेवा यहाँ सन्दर्भ सेवा को ध्यान में रखकर पुस्तकालय वर्गीकरण का निरूपण किया गया है। 4.3 अन्त: पक्ष तुलना दशा सम्बंध

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