बुरे विचार पर शिक्षा चर्चा! – SarkariJobHub.Com

बुरे विचार पर शिक्षा चर्चा!

यहां एक विषम सुझाव का उदाहरण है: मेरा एक रिश्तेदार भारत में एक स्फटिक (रत्न) पढने वाले के पास गया, जिसने से बताया कि उसका दिल अस्वस्थ था और वह अगले नये चांद वाले दिन मर जायेगा। उसने इस भविष्यवाणी को अपने परिवार के सभी सदस्यों को बताना शुरु कर दिया और अपनी वसीयत तैयार करी। इतना मजबूत सुझाव उसके अवचेतन मस्तिष्क में बैठ गया, क्योंकि उसने इस पर पूरी तरह से विश्वास कर लिया था। मेरे रिश्तेदार ने यह भी बताया कि इस रत्न पढने वाले के पास कुछ जादुई शक्तियां भी निहित थीं और वह किसी भी शक्ति का भला अथवा बुरा भी कर सकता है। जिस प्रकार की भविष्यवाणी की गयी थी, वैसे ही उसकी मृत्यु हो गयी, बिना जाने कि अपनी मृत्यु का कारण वह स्वयं था। मुझे लगता है हम में से कई ने इसी प्रकार के बेवकूफी भरे, अजीबोगरीब, अंधविश्वास से भरी कहानियां सुनी हैं। अपने ज्ञान से देखें कि अवचेतन मस्तिष्क किस प्रकार से कार्य करता है। जिस प्रकार से मनुष्य का चेतन, तर्क संगत मस्तिष्क विश्वास करता है: उसी प्रकार अवचेतन मस्तिष्क उसे स्वीकार और उस पर कार्य करता है। मेरा रिश्तेदार खुश, स्वस्थ, जोश से भरा और तगड़ा था, जो बिना किसी कारण भविष्यवक्ता के पास गया। उसने उसे नकारात्मक सुझाव दिये, जिसे उसने स्वीकार किया। वह भयाक्रांत था और हमेशा इस तथ्य को सोचता रहता कि अगले नये चांद के दिन वह मरने वाला है। उसने इसके बारे में सभी को बताना शुरू किया और अपने को उस अंत के लिए तैयार करने लगा!

उसके मन में भी क्रियायें शुरू हो गयीं और उसकी अपनी सोच इसका कारण थी। वह स्वयं अपनी इस मौत को लाया अथवा अपने डर और अंत की आशंका से अपने भौतिक शरीर के विनाश का कारण बना; जिस महिला ने उसकी मृत्यु की भविष्यवाणी की थी, उसके पास उस क्षेत्र की कोई शक्ति नहीं थी। उसके सुझाव में कोई रचनात्मक अथवा उसका अंत करने जैसी कोई शक्ति नहीं थी। यदि उसे मस्तिष्क के नियम का ज्ञान होता तो वह इस नकारात्मक सुझाव को पूरी तरह से नकार देता, यदि वह जानता कि वह अपने विचार और अहसास से ही वह नियंत्रित और शासित होता है। एक टिन के तीर की तरह जिसका लक्ष्य लड़ाकू जहाज पर था। महिला की भविष्यवाणी बिना उसे नुकसान पहुंचाये पूरी तरह से निष्क्रिय और नष्ट करी जा सकती थी। अपने आप में दूसरों द्वारा दिये गये सुझावों की आपके ऊपर कोई शक्ति नहीं है, जब तक कि आप अपने विचारों द्वारा उन्हें शक्ति न दें। आपको अपनी मानसिक स्वीकृति देनी होगी; आपको विचार को स्वीकार करना होगा। तब, यह आपका अपना विचार बन जाता है और आप सोचने लगते हैं। जिदंगी चुनिये! प्यार चुनिये! अच्छा स्वास्थ्य चुनें!

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